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आज पढ़िए कहानी 'नसीब' By जयमनीष

by Admin | Posted: Apr 20, 2020 at 12:06 | Views: 114

आज पढ़िए कहानी 'नसीब' By जयमनीष
Source: wallpaperplay

राजेन्द्र आज रोज़ की तरह सुबह हड़बड़ी में जगा,और रोज़ की तरह सात बजे चुके थे। वो जल्दी से अपने नित्य कार्यो से निवृत्त होकर जल्दी से आफिस की तरफ भागा।
आज तो फिर इसे डॉट पड़ेगी,राजेन्द्र ने घड़ी देखी साढ़े दस बज चुके थे।
अब तो बॉस से डाँट खाना उसका रोज़ का काम हो चुका था।

आखिर वो करता भी तो क्या करता आफिस में शाम छह बजे तक काम करता फिर घर जाकर खाना बनाता और देर रात तक जागता।~
आज भी वो घर आया आज उसने खाना भी नही बनाया और सोचने लगा कुछ पुरानी बातें जो अक्सर वो रोज़ सोचता था।
तीन साल आठ महीने सत्रह दिन गिनती में कितने कम और गुजारने में कितने ज्यादे

उसे आज भी याद है कॉलेज में उसने पहली बार राधिका को देखा था। शांत सी रहने वाली वो लड़की और चुलबुला से ये~
पहली बार तो लगा कि ये कभी भी मिल ही नही सकते क्योंकि दोनों बिल्कुल एक दूसरे के विपरीत थे।
लेकिन किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था,वो भी कंप्यूटर साइंस और ये भी । दोनों क्लास जाते थे और दोनों की जमने लगी।
फिर दोनों को इश्क़ हो गया। चूंकि दोनों समझदार थे तो वो अपनी ज़िंदगी का फैसला ले सकते थे,तय ये हुआ कि कॉलेज खत्म होने के बाद दोनों अपने-अपने घर बात करेंगे अपने रिश्ते के बारे में।
दोनों साथ समय बिताने लगे,कभी किसी पार्क में तो कभी लाइब्रेरी में।

फिर एक दिन अचानक राधिका का मैसेज आता है कि 'मैं जा रही हूँ,मुझे मेरी मंज़िल मिल गयी।शायद हमारा साथ यही तक था,क्योंकि मुझे जो चाहिये वो मुझे मिल गया। प्लीज आज के बाद मुझसे मिलने या मुझे कॉन्टेक्ट करने की कोशिश मत करना'।
राजेन्द्र की दुनिया उजड़ चुकी थी,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे।
उस रात वो एक पल भी नही सोया।

दूसरे दिन पता चला कि राजेन्द्र का सबसे प्यारा दोस्त अभि और राधिका ने कोर्ट मैरिज कर ली।
राजेन्द्र टूट चुका था,वो बस अब बदलना चाहता था।अब राधिका के साथ बिताए वो सारे पल भूलना चाहता था।

लेकिन वो क्या है कि 'हमारा सबसे हसीन सपना ही हमे सबसे ज्यादा दर्द देता है'। आज राजेन्द्र इसको समझ चुका था। उसने कॉलेज खत्म किया और जॉब ढूंढी,और अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू की।
लेकिन हम कितना भी बदल लें हमारा बिता हुआ समय हमें उतना ही परेशान करता है।
तभी उसके फ़ोन पर उसके बॉस का मैसेज आया कल के काम के लिए,राजेन्द्र उठा और फिर से तैयारी करने लगा,कल डाँट सुनने के लिए।

- जयमनीष

Source : Admin




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