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काल भैरव के बारे में कुछ रोचक जानकारी, जो शायद बहुत लोग जानते भी नहीं होंगे

by Arti Jha | Posted: Jan 14, 2021 at 21:26 | Views: 131

काल भैरव के बारे में कुछ रोचक जानकारी, जो शायद बहुत लोग जानते भी नहीं होंगे
Source: haribhoomi

काल भैरव का पूजा करने से भूत पिशाच और काल की बुरी शक्तियां लोगों से दूर रहता है कहा जाता है कि काल भैरव सबसे गुस्से वाले देवता होते हैं।काल भैरव की पूजा करने से नकारात्मक शक्ति हमसे दूर रहती है और सुख समृद्धि मिलती है। अगहन महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरवअष्टमी कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार अगहन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन ही शिव जी के अंश से काल भैरव का जन्म हुआ था। कालभैरव को भगवान शिव का दूसरा रुप माना जाता है।


अब हम बात करते हैं काल भैरव के जन्म कथा के बारे में

महा पुराणों में बताया गया है कि जब ब्राह्मण जी और विष्णु जी में सबसे ज्यादा सर्वश्रेष्ठ कौन है इस बात को लेकर उन दोनों के बीच में बहस होना शुरू हो गया था जब इन दोनों के बीच में इस बात को लेकर लड़ाई होना शुरू हो गया। तो सभी देवता लोग काफी चिंतित हो गए उसके बाद उन लोगों ने वेद से पूछा इन दोनों में सबसे ज्यादा सर्वश्रेष्ठ कौन है,तो वेद से उतर आया जिनके भीतर चराचर,जगत ,भूत ,भविष्य और वर्तमान सभी है वही सबसे श्रेष्ठ हैं। जब ब्रह्मा जी ने यह बात वेद के मुख से सुना तो उन्हें बहुत ज्यादा क्रोध आया और उसके बाद ब्राह्म जी ने अपने पांचवें मुख से भोलेनाथ को बहुत बुरा भला कहना शुरू कर दिया । ब्रह्मा जी के मुंह से भोलेनाथ के प्रति बुरा भला सुनने से वेद को बहुत दुख हुआ। उसी समय एक दिव्य ज्योति के रूप में भगवान रुद्र वहां पर प्रगट हो गए। रूद्र को देखकर ब्रह्माजी ने कहा रुद्र तुम मेरे ही सिर से पैदा हुए हो।मैने बहुत रूद्रन करने के कारण मैंने तुम्हारा नाम रुद्र रखा है। इसीलिए अब तुम मेरे सेवा में आ जाओ।




उसके बाद ब्रह्माजी के इस बात पर भोलेनाथ को बहुत ज्यादा गुस्सा आया। उसके बाद भोलेनाथ ने भैरव को उत्पन्न करके उससी कहा कि तुम ब्रह्मा पर अपना हुकुम चलाओ। भोलेनाथ के इस प्रकार भैरव सर्वशक्तिमान भैरव ने भोलेनाथ के प्रति अपमानजनक बातें बोलने वाले ब्रह्मा जी को अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा जी के पांचवे सर को काटकर धड़ से अलग कर दिया था। उसके बाद भोलेनाथ ने भैरव से कहा अब तुम काशी जाओ जहां पर तुम्हें ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिलेगी। काशी जाने के बाद रुद्र ने भैरव को काशी का कोतवाल बना दिया। आज भी भैरव को काशी जाने वाले लोग भैरव को बिना पूछे वहां से नहीं लौटते कहां जाता है कि काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद अगर कोई भैरव का दर्शन नहीं करता है तो उसका पूजा अधूरा रहता है।

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