Entertainment Hatke Viral Lifestyle Sports Travel News Fashion Food Deals & Offers
Home ›› Literature ›› शहीद-ए-आजम भगत सिंह : मां की चाहत जिंदगी, बेटे की ख्वाहिश कुर्बानी

शहीद-ए-आजम भगत सिंह : मां की चाहत जिंदगी, बेटे की ख्वाहिश कुर्बानी

by Admin | Posted: Aug 31, 2019 at 05:21 | Views: 24

शहीद-ए-आजम भगत सिंह : मां की चाहत जिंदगी, बेटे की ख्वाहिश कुर्बानी
Source: webdunia

जन्म : 27 सितंबर 1907 मृत्यु : 23 मार्च 1931 देश पर अपनी जान न्यौछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने अपनी मां की ममता से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी। कहा जाता है कि भगत सिंह को फांसी की सजा की आशंका के चलते उनकी मां विद्यावती ने उनके जीवन की रक्षा के लिए एक गुरुद्वारे में अखंड पाठ कराया था। इस पर पाठ करने वाले ग्रंथी ने प्रार्थना करते हुए कहा, ‘गुरु साहब... मां चाहती है कि उसके बेटे की जिन्दगी बच जाए, लेकिन बेटा देश के लिए कुर्बान हो जाना चाहता है। मैंने दोनों पक्ष आपके सामने रख दिए हैं जो ठीक लगे, मान लेना।’ शहीद-ए-आजम के पौत्र (भतीजे बाबर सिंह संधु के पुत्र) यादविंदर सिंह ने परिवार के बड़े सदस्यों के संस्मरणों के आधार पर बताया कि विद्यावती जब भगत सिंह के जीवन की रक्षा के लिए अरदास करने गुरुद्वारे गईं तो भगत सिंह ने उनसे कहा था कि वह देश पर बलिदान हो जाने की अपने बेटे की ख्वाहिश का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि जब विद्यावती भगत सिंह से मिलने जेल पहुंचीं, तो शहीद-ए-आजम ने उनसे पूछा कि ग्रंथी ने क्या कहा? इस पर मां ने सारी बात बताई और भगत सिंह ने इसके जवाब में कहा, ‘मां आपके गुरु साहिबान भी यही चाहते हैं कि मैं देश पर कुर्बान हो जाऊं क्योंकि इससे बड़ा कोई और पुण्य नहीं है। देश के लिए मर जाना आपकी ममता से कहीं बड़ा है। यादविंदर ने बताया कि भगत सिंह चाहते थे कि जब उन्हें फांसी हो तो उनकी पार्थिव देह उनका छोटा भाई कुलबीर घर ले जाए और उनकी मां उस समय जेल में हरगिज नहीं आएं। हालांकि, भगत सिंह की यह चाहत पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि अंग्रेजों ने उन्हें तय वक्त से एक दिन पहले ही फांसी पर लटका दिया और टुकड़े-टुकड़े कर उनके शव को सतलुज नदी के किनारे जला दिया। उनके अनुसार भगत सिंह ने अपनी मां से कहा था, ‘मां मेरा शव लेने आप नहीं आना और कुलबीर को भेज देना, क्योंकि यदि आप आएंगी तो आप रो पड़ेंगी और मैं नहीं चाहता कि लोग यह कहें कि भगत सिंह की मां रो रही है।’ पंजाब के लायलपुर जिले (वर्तमान में पाकिस्तान का फैसलाबाद) के बांगा गांव में 27 सितंबर 1907 को जन्मे शहीद-ए-आजम भगत सिंह जेल में मिलने के लिए आने वाली अपनी मां से अक्सर कहा करते थे कि वह रोएं नहीं, क्योंकि इससे देश के लिए उनके बेटे द्वारा किए जा रहे बलिदान का महत्व कम होगा। परिवार के अनुसार, शहीद ए आजम का नाम ‘भागां वाला’ (किस्मत वाला) होने के कारण भगत सिंह पड़ा। उन्हें यह नाम उनकी दादी जयकौर ने दिया था, क्योंकि जिस दिन उनका जन्म हुआ उसी दिन उनके पिता किशन सिंह और चाचा अजित सिंह जेल से छूट कर आए थे। करतार सिंह सराबा को अपना आदर्श मानने वाले भगत सिंह की जिन्दगी में 13 और 23 तारीख का बहुत बड़ा महत्व रहा। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार ने उन्हें क्रांतिकारी बनाने का काम किया। उनके परिवार के सदस्यों के मुताबिक भगत सिंह द्वारा लिखे गए ज्यादातर पत्रों पर 13 या 23 तारीख अंकित है। 23 मार्च 1931 को 23 साल की उम्र में वह देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए।

Source : webdunia




Top Trends on NewsDailyo

» हरतालिका तीज पर डायबिटीज के मरीज व्रत रखने से पहले ये 7 बातें जान लें» जानिए असरदार घरेलु नुस्खें, जिनसे सांसों की दुर्गन्ध होगी चुटकियों में दूर» Sachin Tendulkar's Farewell Speech On The 4th Anniversary Of His Retirement» Amazing Facts About India That Every Indian Should Have To Know» Wal-mart Bought Flipkart For $ 16 Billion, Resigns By Sachin Bansal» पार्टनर को चुनने के ये 5 टिप्स बदल देंगे आपकी जिंदगी» Dangal Actress Molested At Airport » Here Are Five Of Our Favorite Brain Games To Keep Your Mind Sharp» पेट के अलावा इन 10 समस्याओं में भी वरदान है ईसबगोल, जरूर जानिए» Dsssb Pgt Result 2018» आयुर्वेद के अनुसार इन 5 तरीकों से पाएं दर्द से राहत» प्रोटीन, विटामिन तो ठीक है लेकिन क्या सही मात्रा में ले रहे हैं मैग्नीशियम? ऐसे जानें» लाजवाब सत्तू के लड्‍डू» 10 Weird Customs From Across The World That Will Make You Go Wtf» Bjp Leader Called 'draupathi A Feminist' And He Was Necked In Twitter