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आज पढ़िए एक खूबसूरत प्रेम कहानी - सड़क (पहला भाग)

by Admin | Posted: Jan 18, 2019 at 15:47 | Views: 170

आज पढ़िए एक खूबसूरत प्रेम कहानी - सड़क (पहला भाग)

कुछ कहानियां बस कहानियां नहीं होती , वे अपने अंदर कई सदियों का एहसास समेटे हुए होती हैं | जिन्हें पढ़ते-पढ़ते आप कभी मुस्कुराते हैं , कभी हँसते हैं , और कभी कभी आँखे नम भी कर लेते हैं। 
आज हम आपके लिए एक ऐसी ही खूबसूरत सी कहानी लेकर आए हैं ..। कहानी का नाम है सड़क ...। आज हमारे साथ पढ़िए इस कहानी का पहला भाग।


#सड़क (भाग 1)

वो बहुत शर्मीला था! वो बेबाक थी थोड़ी!


रेलवे कालोनी में रहते थे दोनों! लड़की के पिता जी रेलवे में बाबू थे, लड़के के पिता जी टीटी! लड़का बॉयज स्कूल पे पढता था! लड़की कोएड! लड़का बहुतएवरेज दिखता था, पतला दुबला! साइड से मांग निकालता था! लड़की बेहद खूबसूरत, और अपनी हमजोलियों से ज़रा सी बड़ी! ज़रा सी ज्यादा मेच्योर!


‘सुनो तुम पीछे वाली गली में रहते हो न?’ लड़की ने पूछा!


‘क्या? हमसे कह रही हो? हमने क्या किया? हमारा तो रास्ता ही यही है, हम तुम्हारे पीछे थोड़ी न आये!’ लड़के ने चढ़ी साँसों में जवाब दिया!


“लल्लू!” लड़की माथे पर हाथ मारते हुए बोली!


अभी टाइम नहीं है ज्यादा! शाम को मिलोगे, यूकेलिप्टिस वाले पार्क में?”


“क्यों? तुम लड़के बुला के लाओगी? मेरे भी बड़े दोस्त हैं डरते नहीं हैं किसी से!”


शाम को आ जाना सात बजे! हम जा रहे हैं अब! कोई देख लेगा!” लड़की दौड़ के चार कदम आगे हो गई!


‘अपना नाम तो बताओ लल्लू!” लड़की वापस आई!


‘तुम लल्लू ही कह लो, अगर हम तुमको लल्लू दिखते हैं तो!”


लड़की मुस्कुराकर आगे चली गई और गली जहां से मुड़ती थी उसके घर को, वहां से पलट कर देखा और हल्का सा हाथ उठाकर बाय किया!


ये सब कुछ अचानक नहीं हुआ! ये दोनों एक दुसरे को दो साल से ऐसे ही देख रहे थे, रोड के दो तरफ चलते थे बस! और कनखियों से एक दूसर को देखते रहतेथे, बात कोई नहीं करता था! इन दोनों का साथ बस उस 100 मीटर की गली तक का ही था! बड़ी ही खूबसूरत गली थी वो, दोनों तरफ रेलवे के लाल मकानजिनमे आगे बड़ा सा गार्डन होता था और बड़े बड़े पेड़ो की छाँव में सड़क सुस्ताती रहती थी, पत्तियां एक ही पैटर्न में सजी रहती थी रोज, जैसे सडक काज़िरोक्स निकाला गया हो! हमेशा एक सी लगती ही, वही सुकून, वही सन्नाटा और कभी बारिश हो जाए तो वो रोड जैसे जी उठती थी, जैसे कोई इंसान हो, जैसेपुराना कोई साथी किसी पिछले जनम का! कम से कम लड़के के लिए वो सड़क ऐसी ही थी!


वो दोनों छोटे थे पर इतनी समझ थी की ये रोज एक ही टाइम पर एक ही सड़क पर एक दूसरे को रोज़ दिखना प्रोबेबिलिटी के किसी भी नियम से असंभव था!लड़की थोडा धीरे चलती थी, और लड़का उस गली में आने से पहले दौड़ते हुए आता था, फिर अचानक से एकदम एलिगेंस में चलने लगता था!


शाम को लड़के का क्रिकेट मैच था, पर दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था! अपनी काले पट्टे वाली घड़ी घुमा घुमाकर टाइम देख रहा था! सूरज देवता कीशिफ्ट ख़तम हुई सात बजने वाले थे, लड़का यूकेलिप्टिस वाले पार्क में गया, लड़की वहीँ बैठी हुई थी अपनी सहेली के साथ! लड़के को आते देख उसकी सहेलीने अपनी कॉपी उठाई और बोली ‘हम जा रहे हैं, हमको देर हो रही है!”


लड़का उस आखिरी बेंच तक चलते हुए गया और बोला ‘क्या हुआ क्यों बुलाया?


“तुमको बताने के लिए कि तुम लल्लू हो एक नंबर!”


“कायदे में रहो समझी!” लड़का बोला!


तुम क्या ये दो साल से बगल बगल चलते रहते हो, ऐसे देखते हो की चाकू मार कर पैसा छीन लोगे! बात करनी है तो बात तो करो, रोज तुम्हरे चक्कर में डांटखाते हैं, स्कूल से लौटने का टाइम है 4, हम पहुचते हैं 5 बजे!


“हम... हमारा रास्ता है वो, हम तुम्हारा पीछा थोड़ी करते हैं कोई, न हमको बात करनी है!” लड़का झिझकते हुए बोला!


“अच्छा तो फिर हमसे गलती हो गई शायद, चलते हैं हम!” लड़की बोली!


“नहीं मतलब, अब आ गई हो तो बोलो!”


हम तुमसे कहने आये हैं कि हमारे पापा का ट्रान्सफर हो रहा है, हम दिल्ली जा रहे हैं एग्जाम के बाद!”


हमेशा के लिए? लड़का बोला


एक ख़ामोशी के बाद लड़की ने बोला...'हम्म! हमेशा के लिए!'


“हमेशा के लिए जा रही हो? जब जा ही रही थी तो बात ही क्यों की? मेरी तो फील्डिंग सेट हो गई अब!” तुमसे बात कैसे होगी?


दिल्ली में कहाँ रहोगी? मतलब घर आओगी ही नहीं?” लड़के ने कई सारे सवाल एक साथ कर डाले!


“घर तो अब वहीँ होगा न जहाँ पापा का ट्रान्सफर होगा! रहूंगी तो बाबुल के आँगन में ही न” लड़की ने मज़ाक करते हुए बोला!


“तुमको मज़ाक सूझ रहा है? यहाँ साले...हम... हम तो मिलते ही अलग हो गए मतलब” लड़के ने गहरी सांस में गुस्साते हुए बुदबुदाया!


हम? हैं? अच्छा! अभी तो तुम मुझे जानते नहीं थे वो सड़क तो बस रास्ता था तुम्हारा, अब ‘मैं’ और ‘तुम’ ‘हम’ हो गए! लल्लू कहीं के!”


लड़की लड़के के तरफ एक कदम बढाती है और उसके हाथ को देखती है इस उम्मीद में कि शायद वो इशारा समझकर उसका हाथ पकड़ ले पर लड़के कोलगा कि वो उसकी डुप्लिकेट घड़ी को घूर रही है!


“असली है टाइटन की, थोड़ी पुरानी हो गई है!” लड़के ने हाथ पीठ के पीछे छुपाते हुए बोला!


‘अबे तुम सच में लल्लू हो यार!” लड़की ने प्यार से झुंझलाते हुए बोला!


दस सेकण्ड का पॉज हुआ फिर लड़की ने सीरियस टोन में लड़के को देखा और बोला “देखो मुझे पता है कि जो मै बोलने जा रही हूँ, मतलब जो मैं सोच रही हूँ...इसका कोई सेंस नहीं बनेगा...शायद हमारी बात न हो पाए, न ही मैं तुम्हे चिट्ठी लिख पाउंगी, न ही देख पाउंगी, पर मैं वादा कर रही हु कि मैं आउंगी! इसीसड़क पर वापस तुम इंतज़ार करना बस! तुम करोगे न? मुझे पता है कि बकवास कर रही हूँ पर मैं जानती हूँ कि मैं क्या बकवास कर रही हूँ! और शायद हमबहुत छोटे हैं इस सब के लिए पर हम इतने दिन से...कुछ तो बात होगी मतलब... तुम भी तो आये ही न....” लड़की ने एक सांस में किसी थिएटर एक्टर कीतरफ पूरा डायलॉग बोल डाला!” और फिर रुक के, संभल के, लड़के की आँखों में देख कर एक ठहराव के साथ बोला “मैं आउंगी! तुम बस इंतज़ार करना!”


“कब तक?” लड़के ने पूछा!


“जब तक ये सड़क है यहाँ पर और ये पेड़! फ़िल्मी लग रहा है न? मैं आउंगी मगर! देखना तुम! 


अभी जा रही हूँ, पापा आ गए होंगे! सुताई हो जाएगी रोमैंस के चक्कर में!”


लड़की तेज़ कदमों में आगे बढ़ी और फिर वापस आयी!


“अबे नाम तो बताओ यार, जब याद आएगी तो कॉपी के पीछे क्या लिखा करूंगी?”


“तुम जब वापस आओगी तब बताऊंगा, तब तक के लिए लल्लू लिख लेना!”


“वो पहली और आखिरी बार था जब वो दोनों मिले थे! क्या है कि कुछ रिश्ते मैगी जैसे नहीं दम बिरयानी जैसे होते हैं, धीरी आंच पर पकते हैं काफी कुछ मांगते है और सबसे ज्यादा मांगते है तो इंतज़ार और ये भी सच है मोहब्बत और नौकरी तुरंत मिल जाए तो क़द्र कहाँ होती है!


“खैर वक़्त ने उस दिन के बाद एक लम्बी जम्हाई ली और सड़क भी कई साल तक सोती रही जैसे थक गई हो बहुत लम्बी चहल कदमी के बाद!”


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“गर्मी की रात! थोड़ी बारिश के बाद हवा में ठण्ड थी! एक घर कि घंटी बजती है! दरवाज़ा खुलता है एक बीस साल का लड़का दांत निकाले, भवें उचका कर बोलता है! “आओ बे चलें मौसम मस्त है, एक एक बीयर मार लें!”


मम्मी! ओ मम्मी! सिद्धू के पापा की तबियत बहुत सीरिअस है, आई सी यू में हैं, मै बाहर जा रहा हूँ!”


आशू ने अपने घर का गेट बंद करते हुए बोला!


“अबे ऐ आशू तुम हमेशा मेरे बाप को क्यों मरवाते हो बे? सिद्धू ने बाइक पर किक मारते हुए बोला!


“अबे काहे से तुम्हारे बाप ही वो अधिकारी है जो हमरी वाली के बाप के ट्रान्सफर लेटर पर साइन किये थे! पर्सनल खुन्नस है, उनको तो हम दिन में तीन बार मार दें हमारा बस चले तो!” आशू ने सिगरेट मुंह के साइड दबाई और माचिस कि तीली बाइक कि हवा से बचाते हुए बोला!


“ओये आशू कायदे में रहो बे, शाम में सरस्वती जी बैठती है जबान पर सच हो गया तो...?


‘रूचि वापस आ जाये, रूचि वापस आ जाये, रूचि वापस आ जाए!”


“अबे ओये क्या बोले जा रहे हो चूतिये!” सिद्धू हँसते हुए बोला!


“अबे क्या पता सरस्वती बैठी हों?” आशू ने आँखे चमकाते हुए कहा!


अमां यार! तुम्हारा फिर वही रूचि, रूचि! बोलना ही है तो ममता कुलकर्णी बोल दो बे! बहुत सही लगती है यार! वो वाला गाना देखे हो “कोई जाए तो ले आये”


“हाँ देखे है तुम्हारी बुवा जैसी लगती है एकदम, और बियर तुम पिलाओगे ससुर! आज हमारे पास पैसा नहीं है!” आशू ने सिद्धू की गुद्दी पर कंटाप मारते हुए बोला!


“रूचि को शहर छोड़े साढ़े चार साल हो गए थे! पर कुछ था कि वो बाकी रह गया था आशू में! ये भी नहीं कि आशू की ज़िन्दगी में लड़कियां नहीं आयीं और उसे किसी से प्यार नहीं हुआ! पर ये जो पहला प्यार होता है न ये दाढ़ी के पहले बाल जैसा होता है जिस पर शर्म भी आये, फक्र भी आये, न मोड़ा जाए, न तोड़ा जाये और न ही छोड़ा जाए! खैर रूचि को न भूल पाने में बहुत बड़ा हाथ था उस सड़क का! जो आशू के आने जाने का रास्ता थी! जब भी गुज़रता तो एक बार को पलट कर देख ही लेता था उस गली में जिस गली में रूचि मुडती थी! उसकी गर्दन में जैसे ये ऑटोमेटेड प्रोग्राम फिट था!


रात के पौने बारह बज रहे हैं, आशू और सिद्धू बियर पी कर घर लौट रहे हैं ! बाइक तीस की स्पीड में एक्स बनाते हुए लहरा रही हैं!


साइड में एक कार खड़ी थी जिसका इंडिकेटर जल रहा था!


“अबे रोक ज़रा देखे क्या हुआ!” सिद्धू ने आशू से बोला!


अन्दर एक परिवार था! आशू ने बाइक रोकी और पूछा “क्या हुआ अंकल? सब ठीक?”


“अरे पता नहीं बेटा, गाडी अचानक से ही बंद हो गई! पेट्रोल भी फुल है!”


“अच्छा! बारिश से शायद ठंडी पड़ गई होगी! चलिए हम धक्का लगाते हैं आप गियर में डालिए! थोडा स्पीड पकड़ने दीजियेगा, तुरंत डाल देंगे तो भकभका के रुक जायेगी! पहले किये हैं न? कि हम करें?”


“नहीं तुम लगाओ धक्का! अंकल जी ने मौके की नजाकत समझते हुए बोला!”


आशू और सुधीर ने मिलकर धक्का लगाया उस सफ़ेद अम्बैस्डर में, दो तीन एटेम्पट के बाद गाडी स्टार्ट हो गई! और सड़क पर झटके खाकर बढ़ने लगी! आशू को लगा कि शायद अंकल जी उतर कर थैंक्यू बोलेंगे और उसके संस्कारों कि तारीफ़ करेंगे! कहेंगे कि ऐसे अच्छे लड़के आजकल बहुत कम है!” पर गाड़ी सीधे ही आगे बढ़ गई!


उस पूरी सड़क पर एक ही खम्बा था जिसकी लाईट जलती थी! बाकी पूरी रोड अँधेरी थी! जैसे ही गाड़ी उस सिंगल खम्बे कि रोशनी में आई! गाड़ी की पिछली सीट से एक हाथ निकला और फिर एक बेहद खूबसूरत सी लड़की ने चेहरा खिड़की से बाहर निकाल कर कहा ‘थैंक्यू सो मच!”


“कुछ लम्हे जैसे कायनात खुद लिखती है! कुछ हुआ कि जैसे वक़्त थोडा स्लो मो में चल गया! सड़क जैसे एक लम्बी नींद के बाद अंगड़ाई लेकर जाग उठी थी!” आशू के लिए ये वक़्त वही लम्हा लेकर आया था!”


एक बहुत जोर सी बिजली कडकी… जैसे कि आसमान फट के दो हो जाएगा, जैसे कि किसी ने आसमान से फ्लैश मारकर इस लम्हे कि फोटो खींची हो! बारिश एक बार फिर से तेज़ हो गई, हवाएं तेज चलने लगी! मोटी-मोटी बूंदे आशू के चेहरे पर यूं पड़ रही थी जैसे कि पानी में चेहरा पिघल रहा हो!


“अबे चलो बे, नहीं पिलाई हो जाएगी घर पर! ओये आशू, अबे बहिरे! चल साले! खड़ा क्या है बे?” सिद्धू खीजते हुए बोला! 


सिद्धू कि आवाज आशू के कानों पर पड़ तो रही थी पर दिमाग पर असर नहीं था! जैसे कि वो नींद में हो और कोई उठाने कि कोशिश कर रहा हो!


आशू वही खड़ा रहा उस सिंगल खम्बे की लाईट में तर-बतर और दूर जाती गाड़ी की लाईट को देखता रहा! सिद्धू उसे कंधे से खींच रहा था पर उसके पैर जैसे ज़मीन ने पकड लिए थे!


आशू वहीँ रहा... चेहरे पर एक हलकी पर बहुत...बहुत गहरी मुस्कान के साथ!


........................................  जारी रहेगी।



Source : Admin




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